भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद

(पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की एक स्वायत्त निकाय, भारत सरकार)
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महानिदेशक का संदेश


भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् परिवार की ओर से अभिवादन एवं परिषद् की वेबसाइट पर आपका स्वागत है।

 आपको भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् के व्यापक लक्ष्य और संस्थागत मुख्य कार्यक्षेत्रों से अवगत कराते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है। यहां दी गई सूचना संक्षेप में है तथा विस्तृत जानकारी वेबसाइट में संबंधित भागों में उपलब्ध कराई गई है।


1.       भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् मुख्य रूप से वानिकी अनुसंधान, विस्तार तथा वानिकी शिक्षा में कार्यरत है। चूंकि भारत में वनों का प्रबंधन मुख्यतः सरकारी वन भूमि तथा उसके उपयोगकर्ताओं से संबंधित है इसलिए हमारा कार्य वन विभागों तथा वन संसाधन से लाभान्वित होने वाले समुदायों के सेवार्थ है। इस संस्था द्वारा किए गए प्रयासों से ही भारत में होने वाले वन और निजी भूमि पर वृक्षावरण विस्तार की विभिन्न तकनीकें विकसित हो पाई हैं। इसके अतिरिक्त, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, जनसंख्या वृद्धि, खाद्य एवं जल सुरक्षा जैसे वैश्विक विषय भी हमारे सरोकारों में सम्मिलित हैं।

 

2.  वानिकी क्षेत्र में उभरती हुई चुनौतियों का सामना करने के लिए इस परिषद् का गठन 1986 में हुआ तथा इसे 1991 में स्वायत्त निकाय में परिवर्तित किया गया। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् देश के विभिन्न कृषि पारिस्थितिक क्षेत्रों में स्थित नौ अनुसंधान संस्थानों व 5 अनुसंधान केंद्रों के माध्यम से देश की वानिकी अनुसंधान की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। देश में विभिन्न प्रबंधन तकनीकों के विकास में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् के अनुसंधान संस्थानों ने योगदान दिया है। इन संस्थानों में, वन अनुसंधान संस्थान, उष्णकटिबंधीय विश्व में वानिकी अनुसंधान के क्षेत्र में सबसे पुराना संस्थान है।

 

3.  भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद्, वानिकी अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी तथा वन संरक्षण के क्षेत्र में नई चुनौतियों को पूरा करने के लिए भारत सरकार, राज्य सरकारों तथा अन्य हितधारकों जैसे कि किसानों, उद्योगों तथा शिक्षाविदों को परामर्श देने के लिए देश का अग्रणी संगठन है। वर्तमान में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद्, राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय वानिकी अनुसंधान सम्मेलनों द्वारा संबंधित हितधारकों के साथ विस्तृत परामर्श प्रक्रिया के उपरांत, संशोधित राष्ट्रीय वानिकी अनुसंधान योजना तैयार करने की प्रक्रिया में है। नेटवर्किंग तथा जानकारी साझा करने के वर्तमान युग में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् ने अनुसंधान व विस्तार में सहयोग करने हेतु विभिन्न संस्थाओँ जैसे उर्जा अनुसंधान संस्थान (TERI), प्रौद्योगिकी सूचना, पूर्वानुमान तथा आकलन परिषद् (TIFAC) तथा भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के साथ समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर किए हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (ICAR), भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI), केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS), नवोदय विद्यालय समिति (NVS) तथा कई अन्य विश्वविद्यालयों के साथ समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर किए जाने की प्रक्रिया जारी है।

 

4.  वन अनुसंधान संस्थान सम विश्वविद्यालय में विभिन्न एम.एससी. पाठ्यक्रमों जैसे वानिकी, पर्यावरण प्रबंधन, काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और सेल्यूलोज तथा कागज प्रौद्योगिकी के माध्यम से परिषद् उद्योगों के लिए जनशक्ति क्षमता का निर्माण भी कर रही है।

 

5.  भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सयुंक्त राष्ट्र निकायों, संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन संधि (UNFCCC), जैव विविधता संधि (CBD) तथा मरुस्थलीकरण रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र संधि (UNFCCD) में पर्यवेक्षक संगठन का दर्जा प्राप्त है। परिषद्, जलवायु परिवर्तन पर विचार-विमर्शों के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्षेत्रों में सक्रिय रूप से शामिल है। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद्, संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन संधि (UNFCCC) तथा जैव विविधता संधि (CBD) के सदस्य देशों की कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP) बैठकों के दौरान पार्श्व कार्यक्रमों का आयोजन करती है। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् के विशेषज्ञों द्वारा संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन संधि (UNFCCC) की कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP) एवं सहायक संस्थाओं की बैठकों में नियमित रूप से भाग लिया जाता रहा है। परिषद् ने CDM के अंतर्गत वनीकरण/पुनर्वनीकरण परियोजनाओं के लिए तौर तरीकों तथा प्रक्रियाओं को तैयार करने में अपना योगदान दिया है। परिषद् द्वारा संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन संधि (UNFCCC) के REDD+ की संकल्पना में भी योगदान दिया गया है। परिषद् ने भारत के लिए राष्ट्रीय स्तर पर REDD+ रणनीति विकसित की है तथा REDD+ के लिए सुरक्षित सूचना प्रणाली (SIS) विकसित करने की प्रकिया में प्रगति पर है।

 

6.  काष्ठ तथा प्रकाष्ठ की बढ़ती हुई माँग को पूरा करने हेतु, परिषद् महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के आनुवंशिक सुधार पर काम कर रही है। परिषद् के वैज्ञानिकों द्वारा फॉर्म वानिकी एवं कृषि वानिकी के लिए पेड़ों की नई किस्मों तथा कृंतकों का विकास किया गया जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिली है। लघु तथा दीर्घकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं तथा जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से वन संवर्धन, कृषि वानिकी, जैव प्रौद्यौगिकी, वृक्ष सुधार, काष्ठ प्रौद्यौगिकी, वन उत्पाद तथा पर्यावरणीय प्रबंधन के क्षेत्र में विकसित प्रौद्योगिकियों को उपयोगकर्ता अभिकरणों तक पहुँचाया गया है।

 

7.  परिषद्, विभिन्न पक्षकारों को परामर्श के रूप में विशेषज्ञता उपलब्ध कराती है। इनमें, पर्यावरण प्रबंधन योजनाओं को तैयार करना तथा जल विद्युत संयंत्रों, खनन कंपनियों, जल आपूर्ति अभिकरणों आदि के लिए पर्यावरण समाघात आकलन (Environment Impact Assessment) शामिल हैं। निम्नीकृत खानों तथा खानों के अधिभार के पुर्नवास हेतु प्रौद्योगिकी का विकास किया गया है। नगर पालिकाओं को वृक्ष कुंजों के रख-रखाव तथा वृक्ष कतारों को विकसित करने के लिए विशेषज्ञों की सेवाएं भी प्रदान की गई हैं।

 

8.  भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् द्वारा वानिकी शिक्षा में राष्ट्रव्यापी सुधार हेतु वानिकी शिक्षा से संबद्ध विश्वविद्यालयों के प्रमाणीकरण की शुरूआत की है जिसका उद्देश्य शिक्षण, अनुसंधान, परीक्षा तथा अन्य अकादमिक गतिविधियों के उचित मानकों के अनुसार रख-रखाव के लिए तंत्र स्थापित करना है जिससे विद्यार्थियों को वानिकी क्षेत्र में सेवाएं देने तथा सरकारी एवं निजी उद्यमों में रोजगार के अवसर तलाशने में मदद मिलेगी।

 

9.   यह परिषद्, भारत में फैले अपने अनुसंधान संस्थानों तथा केन्द्रों के माध्यम से वन आधारित समुदायों को तकनीकी कौशल उपलब्ध कराने के साथ-साथ वन संसाधनों के बेहतर उपयोग से अपनी आजीविका के अवसरों में बढ़ोतरी करने में उनका मार्गदर्शन कर रही है। किसानों तथा अन्य हितधारकों के लाभ के लिए, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् प्रौद्योगिकियों के विस्तार हेतु, राज्यों में वन विज्ञान केन्द्रों की स्थापना की गई है।

 

10.       मुझे आशा है कि यह वेबसाइट आपको हमारी गतिविधियों के बारे में एक विहंगावलोकन उपलब्ध कराएगी। मैं चाहूंगा कि वेबसाइट को और अधिक अनुकूल एवं प्रभावी बनाने के लिए उपयोगकर्ता अपने विचार हम तक पहुंचाएं।

 


डा0 सुरेश गैरोला, भा.व.से.

महानिदेशक,                         

भा.वा.अ.शि.प. 

अस्वीकरण ( डिस्क्लेमर): दिखाई गई सूचना को यथासंभव सही रखने के सभी प्रयास किए गए हैं। वेबसाइट पर उपलब्ध सूचना के अशुद्ध होने के कारण किसी भी व्यक्ति के किसी भी नुकसान के लिए भारतीय वानिकी अनुसन्धान एवं शिक्षा परिषद उत्तरदायी नहीं होगा। किसी भी विसंगति के पाए जाने पर head_it@icfre.org के संज्ञान में लाएं।